गृह दाह – मुंशी प्रेमचंद (Griha Daah – Munshi Premchand) – Part 3
गृह दाह – मुंशी प्रेमचंद (Griha Daah – Munshi Premchand) देवप्रिया-क्या कलकत्ते जाओगे ज्ञान.-जी हाँ। देवप्रिया-उन्हीं को क्यों नहीं बुलाते ज्ञान.-उन्हें कौन मुँह ले कर बुलाऊँ आप लोगों ने पहिले ही मेरे मुँह में कालिख लगा दी है। ऐसा देव-पुरुष…
