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माँ – मुंशी प्रेमचंद ( Maa – Munshi Premchand )

माँ – मुंशी प्रेमचंद ( Maa – Munshi Premchand ) माँ आज बन्दी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था। इन तीन वर्षों में उसने कठिन तपस्या करके जो दस-पाँच रूपये जमा…

एक आँच की कसर – मुंशी प्रेमचंद ( Ek Aanch ki Kasar – Munshi Premchand )

एक आँच की कसर – मुंशी प्रेमचंद ( Ek Aanch ki Kasar – Munshi Premchand ) एक आँच की कसर सारे नगर में महाशय यशोदानन्द का बखान हो रहा था। नगर ही में नहीं, समस्त प्रांत में उनकी कीर्ति गायी…

स्त्री और पुरुष- मुंशी प्रेमचंद ( Stree aur Purush – Munshi Premchand )

स्त्री और पुरुष – मुंशी प्रेमचंद ( Stree aur Purush – Munshi Premchand ) स्त्री और पुरुष विपिन बाबू के लिए स्त्री ही संसार की सुन्दर वस्तु थी। वह कवि थे और उनकी कविता के लिए स्त्रियों के रूप और…

झांकी – मुंशी प्रेमचंद ( Jhanki – Munshi Premchand )

झांकी – मुंशी प्रेमचंद ( Jhanki – Munshi Premchand ) झांकी कई दिनों से घर में कलह मचा हुआ था। माँ अलग मुँह फुलाये बैठी थी, स्त्री अलग। घर की वायु में जैसे विष भरा हुआ था। रात को भोजन…

कज़ाकी – मुंशी प्रेमचंद ( Kazaki – Munshi Premchand )

कज़ाकी – मुंशी प्रेमचंद ( Kazaki – Munshi Premchand ) कज़ाकी मेरी बाल-स्मृतियों में ‘कजाकी’ एक न मिटने वाला व्यक्ति है। आज चालीस साल गुजर गये; कजाकी की मूर्ति अभी तक आँखों के सामने नाच रही है। मैं उन दिनों…

कामना-तरु – मुंशी प्रेमचंद ( Kaamna Taru – Munshi Premchand )

कामना-तरु – मुंशी प्रेमचंद ( Kaamna Taru – Munshi Premchand ) कामना-तरु राजा इन्द्रनाथ का देहांत हो जाने के बाद कुँवर राजनाथ को शत्रुओं ने चारों ओर से ऐसा दबाया कि उन्हें अपने प्राण ले कर एक पुराने सेवक की…

शिकारी राजकुमार – मुंशी प्रेमचंद ( Shikari Rajkumar – Munshi Premchand )

शिकारी राजकुमार – मुंशी प्रेमचंद ( Shikari Rajkumar – Munshi Premchand ) शिकारी राजकुमार मई का महीना और मध्याह्न का समय था। सूर्य की आँखें सामने से हटकर सिर पर जा पहुँची थीं, इसलिए उनमें शील न था। ऐसा विदित…

घासवाली – मुंशी प्रेमचंद ( Ghaswali – Munshi Premchand )

घासवाली – मुंशी प्रेमचंद ( Ghaswali – Munshi Premchand ) घासवाली मुलिया हरी-हरी घास का गट्ठा लेकर आयी, तो उसका गेहुआँ रंग कुछ तमतमाया हुआ था और बड़ी-बड़ी मद-भरी आँखो में शंका समाई हुई थी। महावीर ने उसका तमतमाया हुआ…

पाप का अग्निकुंड – मुंशी प्रेमचंद ( Paap ka Agnikun – Munshi Premchand )

पाप का अग्निकुंड – मुंशी प्रेमचंद ( Paap ka Agnikund – Munshi Premchand ) पाप का अग्निकुंड कुँवर पृथ्वीसिंह महाराज यशवंतसिंह के पुत्र थे। रूप गुण और विद्या में प्रसिद्ध थे। ईरान मिò श्याम आदि देशों में परिभ्रमण कर चुके…

दुर्गा का मंदिर – मुंशी प्रेमचंद ( Durga ka Mandir – Munshi Premchand )

दुर्गा का मंदिर – मुंशी प्रेमचंद ( Durga ka Mandir – Munshi Premchand ) दुर्गा का मंदिर बाबू ब्रजनाथ कानून पढ़ने में मग्न थे, और उनके दोनों बच्चे लड़ाई करने में। श्यामा चिल्लाती, कि मुन्नू मेरी गुड़िया नहीं देता। मुन्नू…

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