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ईश्वरीय न्याय – मुंशी प्रेमचंद ( Ishawriya Nyay – Munshi Premchand )

ईश्वरीय न्याय – मुंशी प्रेमचंद ( Ishawriya Nyay – Munshi Premchand ) ईश्वरीय न्याय 1 कानपुर जिले में पंडित भृगुदत्त नामक एक बड़े जमींदार थे। मुंशी सत्यनारायण उनके कारिंदा थे। वह बड़े स्वामिभक्त और सच्चरित्र मनुष्य थे। लाखों रुपये की…

हिंसा परमो धर्म: – मुंशी प्रेमचंद ( Hinsa Parmo Dharma – Munshi Premchand )

हिंसा परमो धर्म: – मुंशी प्रेमचंद ( Hinsa Parmo Dharma – Munshi Premchand ) हिंसा परमो धर्म: 1 दुनिया में कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो किसी के नौकर न होते हुए सबके नौकर होते हैं, जिन्हें कुछ अपना काम…

मुक्ति-मार्ग – मुंशी प्रेमचंद ( Mukti Marg – Munshi Premchand )

मुक्ति-मार्ग – मुंशी प्रेमचंद ( Mukti Marg – Munshi Premchand ) मुक्ति-मार्ग सिपाही को अपनी लाल पगड़ी पर, सुन्दरी को अपने गहनों पर और वैद्य को अपने सामने बैठे हुए रोगियों पर जो घमंड होता है, वही किसान को अपने…

आखिरी हीला – मुंशी प्रेमचंद ( Aakhiri Hila – Munshi Premchand )

आखिरी हीला – मुंशी प्रेमचंद ( Aakhiri Hila – Munshi Premchand ) आखिरी हीला यद्यपि मेरी स्मरण-शक्ति पृथ्वी के इतिहास की सारी स्मरणीय तारीखें भूल गयीं, वह तारीखें जिन्हें रातों को जागकर और मस्तिष्क को खपाकर याद किया था; मगर…

दफ़्तरी – मुंशी प्रेमचंद ( Daftari – Munshi Premchand )

दफ़्तरी – मुंशी प्रेमचंद ( Daftari – Munshi Premchand ) दफ़्तरी रफाकत हुसेन मेरे दफ्तर का दफ्तरी था। 10 रु. मासिक वेतन पाता था। दो-तीन रुपये बाहर के फुटकर काम से मिल जाते थे। यही उसकी जीविका थी, पर वह…

दुस्साहस – मुंशी प्रेमचंद ( Dussahas – Munshi Premchand )

दुस्साहस – मुंशी प्रेमचंद ( Dussahas – Munshi Premchand ) दुस्साहस लखनऊ के नौबस्ते मोहल्ले में एक मुंशी मैकूलाल मुख्तार रहते थे। बड़े उदार, दयालु और सज्जन पुरुष थे। अपने पेशे में इतने कुशल थे कि ऐसा बिरला ही कोई…

कप्तानसाहब – मुंशी प्रेमचंद ( Kaptansahab – Munshi Premchand )

कप्तानसाहब – मुंशी प्रेमचंद ( Kaptansahab – Munshi Premchand ) कप्तानसाहब जगत सिंह को स्कूल जान कुनैन खाने या मछली का तेल पीने से कम अप्रिय न था। वह सैलानी, आवारा, घुमक्कड़ युवक थां कभी अमरूद के बागों की ओर…

नशा – मुंशी प्रेमचंद ( Nasha – Munshi Premchand )

नशा – मुंशी प्रेमचंद ( Nasha – Munshi Premchand ) नशा ईश्वरी एक बड़े जमींदार का लड़का था और मैं एक गरीब क्लर्क का, जिसके पास मेहनत-मजूरी के सिवा और कोई जायदाद न थी। हम दोनों में परस्पर बहसें होती…

दो कब्रें – मुंशी प्रेमचंद ( Do Kabren – Munshi Premchand )

दो कब्रें – मुंशी प्रेमचंद ( Do Kabren – Munshi Premchand ) दो कब्रें अब न वह यौवन है, न वह नशा, न वह उन्माद। वह महफिल उठ गई, वह दीपक बुझ गया, जिससे महफिल की रौनक थी। वह प्रेममूर्ति…

मर्यादा की वेदी – मुंशी प्रेमचंद ( Maryada ki Vedi – Munshi Premchand) Part 2

मर्यादा की वेदी – मुंशी प्रेमचंद ( Maryada ki Vedi – Munshi Premchand) Part 2 5 दस बजे रात का समय था। रणछोड़ जी के मन्दिर में कीर्तन समाप्त हो चुका था और वैष्णव साधु बैठे हुए प्रसाद पा रहे…

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