विस्मृति – मुंशी प्रेमचंद (Vismriti – Munshi Premchand)

विस्मृति – मुंशी प्रेमचंद (Vismriti – Munshi Premchand) चित्रकूट के सन्निकट धनगढ़ नामक एक गाँव है। कुछ दिन हुए वहाँ शानसिंह और गुमानसिंह दो भाई रहते थे। ये जाति के ठाकुर (क्षत्रिय) थे। युद्धस्थल में वीरता के कारण उनके पूर्वजों…

आभूषण – मुंशी प्रेमचंद (Aabhushan – Munshi Premchand) – Part – 2

आभूषण – मुंशी प्रेमचंद (Aabhushan – Munshi Premchand) मैं इस वक्त गाना नहीं सुनना चाहता। तुम्हें सुनाता ही कौन है क्या मेरे कानों पर भी तुम्हारा अधिकार है फजूल की बमचख… तुमसे मतलब मैं अपने घर में यह कोलाहल न…

आभूषण – मुंशी प्रेमचंद (Aabhushan – Munshi Premchand)

आभूषण – मुंशी प्रेमचंद (Aabhushan – Munshi Premchand) आभूषणों की निंदा करना हमारा उद्देश्य नहीं है। हम असहयोग का उत्पीड़न सह सकते हैं पर ललनाओं के निर्दय घातक वाक्बाणों को नहीं ओढ़ सकते। तो भी इतना अवश्य कहेंगे कि इस…

दिल की रानी – मुंशी प्रेमचंद (Dil ki Rani – Munshi Premchand)

दिल की रानी – मुंशी प्रेमचंद (Dil ki Rani – Munshi Premchand) जिन वीर तुर्कों के प्रखर प्रताप से ईसाई-दुनिया काँप रही थी, उन्हीं का रक्त आज कुस्तुन्तुनिया की गलियों में बह रहा है। वही कुस्तुन्तुनिया जो सौ साल पहले…

परीक्षा – मुंशी प्रेमचंद (Pariksha – Munshi Premchand)

परीक्षा – मुंशी प्रेमचंद (Pariksha – Munshi Premchand) नादिरशाह की सेना ने दिल्ली में कत्लेआम कर रखा है। गलियों में खून की नदियाँ बह रही हैं। चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है। बाजार बंद हैं। दिल्ली के लोग घरों के…

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