मंत्र – मुंशी प्रेमचंद (Mantra – Munshi Premchand)

मंत्र – मुंशी प्रेमचंद (Mantra – Munshi Premchand) पंडित लीलाधर चौबे की जबान में जादू था। जिस वक्त वह मंच पर खड़े हो कर अपनी वाणी की सुधावृष्टि करने लगते थे; श्रोताओं की आत्माएँ तृप्त हो जाती थीं, लोगों पर…

महातीर्थ – मुंशी प्रेमचंद (Mahateerth – Munshi Premchand) Part 2

महातीर्थ – मुंशी प्रेमचंद (Mahateerth – Munshi Premchand) दूसरे दिन सत्यप्रकाश ने घर से निकलने की तैयारी कर दी। उसकी उम्र अब 16 साल की हो गयी थी। इतनी बातें सुनने के बाद अब उसे उस घर में रहना असह्य…

महातीर्थ – मुंशी प्रेमचंद (Mahateerth – Munshi Premchand)

महातीर्थ – मुंशी प्रेमचंद (Mahateerth – Munshi Premchand) सत्यप्रकाश के जन्मोत्सव में लाला देवप्रकाश ने बहुत रुपये खर्च किये थे। उसका विद्यारम्भ-संस्कार भी खूब धूम-धाम से किया गया। उसके हवा खाने को एक छोटी-सी गाड़ी थी। शाम को नौकर उसे…

गृह दाह – मुंशी प्रेमचंद (Griha Daah – Munshi Premchand) – Part 3

गृह दाह – मुंशी प्रेमचंद (Griha Daah – Munshi Premchand) देवप्रिया-क्या कलकत्ते जाओगे ज्ञान.-जी हाँ। देवप्रिया-उन्हीं को क्यों नहीं बुलाते ज्ञान.-उन्हें कौन मुँह ले कर बुलाऊँ आप लोगों ने पहिले ही मेरे मुँह में कालिख लगा दी है। ऐसा देव-पुरुष…

गृह दाह – मुंशी प्रेमचंद (Griha Daah – Munshi Premchand) – Part – 2

गृह दाह – मुंशी प्रेमचंद (Griha Daah – Munshi Premchand) उस दिन से सत्यप्रकाश के स्वभाव में एक विचित्र परिवर्तन दिखायी देने लगा। वह घर में बहुत कम आता। पिता आते तो उनसे मुँह छिपाता फिरता। कोई खाना खाने को…

गृह दाह – मुंशी प्रेमचंद (Griha Daah – Munshi Premchand)

गृह दाह – मुंशी प्रेमचंद (Griha Daah – Munshi Premchand) सत्यप्रकाश के जन्मोत्सव में लाला देवप्रकाश ने बहुत रुपये खर्च किये थे। उसका विद्यारम्भ-संस्कार भी खूब धूम-धाम से किया गया। उसके हवा खाने को एक छोटी-सी गाड़ी थी। शाम को…

पूस की रात – मुंशी प्रेमचंद (Poos ki Raat – Munshi Premchand)

पूस की रात – मुंशी प्रेमचंद Poos ki Raat – Munshi Premchand हल्कू ने आकर स्त्री से कहा- सहना आया है, लाओ, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे । मुन्नी झाड़ू लगा रही थी।…

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