
गुजरात स्थित गैर-सरकारी संगठन Justice on Trial ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी BBC की विवादित डॉक्यूमेंट्री India: The Modi Question को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर ₹10,000 करोड़ के मानहानि मुकदमे को वापस ले लिया है। हालांकि, यह इस विवाद का पूर्ण अंत नहीं है, क्योंकि हाईकोर्ट ने संगठन को उसी cause of action पर नया मुकदमा दाखिल करने की स्वतंत्रता दे दी है।
क्या है पूरा मामला?
BBC ने जनवरी 2023 में दो भागों वाली डॉक्यूमेंट्री India: The Modi Question जारी की थी। डॉक्यूमेंट्री में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर और विशेष रूप से 2002 के गुजरात दंगों के संदर्भ में उनकी भूमिका तथा उस समय की घटनाओं पर चर्चा की गई थी।
डॉक्यूमेंट्री के प्रसारण के बाद भारत में बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हुआ। केंद्र सरकार ने डॉक्यूमेंट्री को “propaganda” और “colonial mindset” का प्रतिबिंब बताते हुए इसकी आलोचना की थी। सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसके वीडियो और उससे संबंधित सामग्री को हटाने के निर्देश भी दिए थे।
इसी विवाद के बीच गुजरात स्थित NGO Justice on Trial ने BBC के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
₹10,000 करोड़ की क्षतिपूर्ति क्यों मांगी गई थी?
NGO का आरोप था कि BBC की डॉक्यूमेंट्री ने न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बल्कि भारत की प्रतिष्ठा, भारतीय न्यायपालिका और गुजरात में 2002 के दंगों से संबंधित तत्कालीन प्रशासनिक एवं न्यायिक व्यवस्था की छवि को भी नुकसान पहुंचाया।
मुकदमे में लगभग ₹10,000 करोड़ के damages की मांग की गई थी। NGO का कहना था कि डॉक्यूमेंट्री के कारण प्रधानमंत्री, भारत सरकार, गुजरात सरकार तथा भारत के लोगों की प्रतिष्ठा और goodwill को नुकसान पहुंचा।
मुकदमा वापस क्यों लिया गया?
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष इस मुकदमे की maintainability से संबंधित प्रश्न उठे थे।
मामला वर्ष 2023 में दाखिल किया गया था, लेकिन मुकदमे की आगे की कार्यवाही लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी। अदालत द्वारा बार-बार सुनवाई के लिए अवसर दिए जाने के बावजूद मामले में कई बार adjournments लिए गए।
दिसंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने NGO को maintainability के मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए अंतिम अवसर दिया था।
इसके बाद अप्रैल 2026 में भी NGO की ओर से adjournment मांगे जाने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने उस पर ₹20,000 की costs लगाई थी। अदालत ने उस समय यह भी नोट किया था कि पहले ही अंतिम अवसर दिया जा चुका था।
अंततः सितंबर 2026 में NGO ने मुकदमा वापस लेने का निर्णय लिया।
3 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट में क्या हुआ?
मामला Justice Tushar Rao Gedela के समक्ष 3 सितंबर 2026 को आया।
NGO की ओर से अधिवक्ता Siddharth Sharma ने अदालत को बताया कि उन्हें मुकदमा वापस लेने के निर्देश मिले हैं। साथ ही उन्होंने उसी cause of action के संबंध में fresh suit दाखिल करने की liberty मांगी।
अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया।
अदालत के आदेश में कहा गया:
“Accordingly, the I.P.A. 1/2023 alongwith the suit is dismissed as withdrawn with liberty so sought, granted.”
अर्थात, Indigent Person Application (IPA) और उसके साथ दायर suit को withdrawn के रूप में समाप्त किया गया और नया मुकदमा दाखिल करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई।
Indigent Person Application क्या थी?
इस मुकदमे का एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू Order XXXIII, Code of Civil Procedure, 1908 से संबंधित था।
₹10,000 करोड़ जैसी अत्यधिक बड़ी राशि का दावा करने वाले मुकदमे में court fee भी बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाता है। NGO ने अदालत से यह अनुमति मांगी थी कि उसे indigent person के रूप में मुकदमा आगे बढ़ाने दिया जाए, ताकि prescribed court fee का भुगतान किए बिना अथवा तत्काल भुगतान किए बिना proceedings शुरू की जा सकें।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस application पर BBC को notice भी जारी किया था। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत के समक्ष मुख्य suit पर summons जारी होने से पहले indigent-person application और उससे जुड़े procedural मुद्दे महत्वपूर्ण रहे।
यही कारण है कि इस मामले को केवल एक सामान्य defamation case के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। इसमें defamation, damages, court fee, indigent-person procedure और maintainability जैसे कई procedural और substantive मुद्दे जुड़े हुए थे।
मुकदमे की महत्वपूर्ण Timeline
वर्ष/तारीख
घटनाक्रम
जनवरी 2023
BBC ने India: The Modi Question डॉक्यूमेंट्री जारी की
2023
Justice on Trial ने BBC के खिलाफ ₹10,000 करोड़ की damages वाली defamation suit दाखिल की
22 मई 2023
Delhi HC ने NGO की Indigent Person Application पर BBC को notice जारी किया
2024
मुकदमे की maintainability पर सवाल उठे
दिसंबर 2025
अदालत ने maintainability पर arguments के लिए अंतिम अवसर दिया
15 अप्रैल 2026
repeated adjournment के लिए ₹20,000 costs लगाई गई
3 सितंबर 2026
NGO ने suit और IPA वापस लेने की अनुमति मांगी
3 सितंबर 2026
Delhi HC ने suit को withdrawn के रूप में समाप्त किया और fresh suit की liberty दी
7 सितंबर 2026
अदालत का आदेश सार्वजनिक रिपोर्टों में प्रमुखता से सामने आया
क्या अब BBC के खिलाफ फिर से मुकदमा हो सकता है?
हां।
यह इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है।
NGO के वकील ने स्पष्ट रूप से कहा कि संगठन same cause of action पर fresh suit दाखिल करना चाहता है। अदालत ने भी withdrawal की अनुमति देते हुए fresh suit दाखिल करने की liberty प्रदान की।
इसलिए वर्तमान घटनाक्रम को “मामला हमेशा के लिए खत्म” कहना सही नहीं होगा। फिलहाल पुरानी proceedings समाप्त हो गई हैं, लेकिन NGO के पास नया मुकदमा दाखिल करने का रास्ता खुला है।
हालांकि, यदि नया मुकदमा दाखिल किया जाता है तो उसके सामने वही या अन्य maintainability, limitation, court-fee और procedural प्रश्न उठ सकते हैं—यह इस बात पर निर्भर करेगा कि नया suit किस रूप में और किन पक्षकारों/दावों के साथ दाखिल किया जाता है।
BBC की डॉक्यूमेंट्री को लेकर पहले भी कानूनी विवाद
India: The Modi Question को लेकर यह अकेला कानूनी विवाद नहीं था।
फरवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी BBC के खिलाफ कार्रवाई और डॉक्यूमेंट्री पर रोक से संबंधित याचिकाएं आई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने BBC पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली PIL को खारिज कर दिया था।
इसके अतिरिक्त, BBC की डॉक्यूमेंट्री को लेकर अन्य defamation proceedings भी सामने आई थीं।
इसलिए Justice on Trial का ₹10,000 करोड़ वाला मुकदमा BBC documentary से संबंधित व्यापक कानूनी और राजनीतिक विवाद का एक हिस्सा था।
इस घटनाक्रम का कानूनी महत्व
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात ₹10,000 करोड़ की रकम नहीं बल्कि procedural history है।
एक ओर plaintiff ने अत्यंत बड़ी damages claim की। दूसरी ओर, इतने बड़े monetary claim के कारण court-fee और indigent-person procedure महत्वपूर्ण हो गए। इसके बाद maintainability का प्रश्न उठा और proceedings में लगातार adjournments भी हुए।
अंततः plaintiff ने पुराने proceedings को withdraw कर लिया, लेकिन fresh suit की liberty हासिल कर ली।
इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि NGO का BBC के खिलाफ आरोप न्यायिक रूप से सही या गलत सिद्ध हो चुका है। अदालत ने डॉक्यूमेंट्री की merits पर कोई final finding नहीं दी है।
BBC की India: The Modi Question डॉक्यूमेंट्री पर चल रहा ₹10,000 करोड़ का defamation litigation फिलहाल एक महत्वपूर्ण procedural मोड़ पर पहुंच गया है। Justice on Trial ने दिल्ली हाईकोर्ट से अपना मुकदमा वापस ले लिया है, लेकिन अदालत ने उसे उसी cause of action पर fresh suit दाखिल करने की अनुमति दे दी है।
इसलिए वर्तमान स्थिति को संक्षेप में ऐसे समझा जा सकता है:
₹10,000 करोड़ का दावा अदालत ने खारिज नहीं किया है → BBC को merits पर दोषमुक्त नहीं किया गया है → plaintiff ने अपना मौजूदा suit withdraw किया है → और fresh suit दाखिल करने की liberty प्राप्त की है।
यह distinction खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि सोशल मीडिया पर इस खबर को आसानी से “₹10,000 करोड़ का केस वापस”, “BBC को क्लीन चिट” या “BBC के खिलाफ केस हार गया” जैसे भ्रामक शीर्षकों के साथ पेश किया जा सकता है। उपलब्ध न्यायिक रिपोर्टिंग के आधार पर फिलहाल सबसे सटीक निष्कर्ष यही है कि पुरानी proceedings withdrawn हुई हैं, जबकि विवाद को fresh litigation के जरिए दोबारा उठाने का रास्ता खुला है।

