प्रायश्चित – मुंशी प्रेमचंद ( Prayashchit – Munshi Premchand )

प्रायश्चित – मुंशी प्रेमचंद ( Prayashchit – Munshi Premchand ) प्रायश्चित 1 दफ्तर में जरा देर से आना अफसरों की शान है। जितना ही बड़ा अधिकारी होता है, उत्तरी ही देर में आता है; और उतने ही सबेरे जाता भी…

माँ – मुंशी प्रेमचंद ( Maa – Munshi Premchand )

माँ – मुंशी प्रेमचंद ( Maa – Munshi Premchand ) माँ आज बन्दी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था। इन तीन वर्षों में उसने कठिन तपस्या करके जो दस-पाँच रूपये जमा…

एक आँच की कसर – मुंशी प्रेमचंद ( Ek Aanch ki Kasar – Munshi Premchand )

एक आँच की कसर – मुंशी प्रेमचंद ( Ek Aanch ki Kasar – Munshi Premchand ) एक आँच की कसर सारे नगर में महाशय यशोदानन्द का बखान हो रहा था। नगर ही में नहीं, समस्त प्रांत में उनकी कीर्ति गायी…

स्त्री और पुरुष- मुंशी प्रेमचंद ( Stree aur Purush – Munshi Premchand )

स्त्री और पुरुष – मुंशी प्रेमचंद ( Stree aur Purush – Munshi Premchand ) स्त्री और पुरुष विपिन बाबू के लिए स्त्री ही संसार की सुन्दर वस्तु थी। वह कवि थे और उनकी कविता के लिए स्त्रियों के रूप और…

झांकी – मुंशी प्रेमचंद ( Jhanki – Munshi Premchand )

झांकी – मुंशी प्रेमचंद ( Jhanki – Munshi Premchand ) झांकी कई दिनों से घर में कलह मचा हुआ था। माँ अलग मुँह फुलाये बैठी थी, स्त्री अलग। घर की वायु में जैसे विष भरा हुआ था। रात को भोजन…

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