कज़ाकी – मुंशी प्रेमचंद ( Kazaki – Munshi Premchand )

कज़ाकी – मुंशी प्रेमचंद ( Kazaki – Munshi Premchand ) कज़ाकी मेरी बाल-स्मृतियों में ‘कजाकी’ एक न मिटने वाला व्यक्ति है। आज चालीस साल गुजर गये; कजाकी की मूर्ति अभी तक आँखों के सामने नाच रही है। मैं उन दिनों…

कामना-तरु – मुंशी प्रेमचंद ( Kaamna Taru – Munshi Premchand )

कामना-तरु – मुंशी प्रेमचंद ( Kaamna Taru – Munshi Premchand ) कामना-तरु राजा इन्द्रनाथ का देहांत हो जाने के बाद कुँवर राजनाथ को शत्रुओं ने चारों ओर से ऐसा दबाया कि उन्हें अपने प्राण ले कर एक पुराने सेवक की…

शिकारी राजकुमार – मुंशी प्रेमचंद ( Shikari Rajkumar – Munshi Premchand )

शिकारी राजकुमार – मुंशी प्रेमचंद ( Shikari Rajkumar – Munshi Premchand ) शिकारी राजकुमार मई का महीना और मध्याह्न का समय था। सूर्य की आँखें सामने से हटकर सिर पर जा पहुँची थीं, इसलिए उनमें शील न था। ऐसा विदित…

घासवाली – मुंशी प्रेमचंद ( Ghaswali – Munshi Premchand )

घासवाली – मुंशी प्रेमचंद ( Ghaswali – Munshi Premchand ) घासवाली मुलिया हरी-हरी घास का गट्ठा लेकर आयी, तो उसका गेहुआँ रंग कुछ तमतमाया हुआ था और बड़ी-बड़ी मद-भरी आँखो में शंका समाई हुई थी। महावीर ने उसका तमतमाया हुआ…

पाप का अग्निकुंड – मुंशी प्रेमचंद ( Paap ka Agnikun – Munshi Premchand )

पाप का अग्निकुंड – मुंशी प्रेमचंद ( Paap ka Agnikund – Munshi Premchand ) पाप का अग्निकुंड कुँवर पृथ्वीसिंह महाराज यशवंतसिंह के पुत्र थे। रूप गुण और विद्या में प्रसिद्ध थे। ईरान मिò श्याम आदि देशों में परिभ्रमण कर चुके…

दुर्गा का मंदिर – मुंशी प्रेमचंद ( Durga ka Mandir – Munshi Premchand )

दुर्गा का मंदिर – मुंशी प्रेमचंद ( Durga ka Mandir – Munshi Premchand ) दुर्गा का मंदिर बाबू ब्रजनाथ कानून पढ़ने में मग्न थे, और उनके दोनों बच्चे लड़ाई करने में। श्यामा चिल्लाती, कि मुन्नू मेरी गुड़िया नहीं देता। मुन्नू…

ईश्वरीय न्याय – मुंशी प्रेमचंद ( Ishawriya Nyay – Munshi Premchand )

ईश्वरीय न्याय – मुंशी प्रेमचंद ( Ishawriya Nyay – Munshi Premchand ) ईश्वरीय न्याय 1 कानपुर जिले में पंडित भृगुदत्त नामक एक बड़े जमींदार थे। मुंशी सत्यनारायण उनके कारिंदा थे। वह बड़े स्वामिभक्त और सच्चरित्र मनुष्य थे। लाखों रुपये की…

हिंसा परमो धर्म: – मुंशी प्रेमचंद ( Hinsa Parmo Dharma – Munshi Premchand )

हिंसा परमो धर्म: – मुंशी प्रेमचंद ( Hinsa Parmo Dharma – Munshi Premchand ) हिंसा परमो धर्म: 1 दुनिया में कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो किसी के नौकर न होते हुए सबके नौकर होते हैं, जिन्हें कुछ अपना काम…

मुक्ति-मार्ग – मुंशी प्रेमचंद ( Mukti Marg – Munshi Premchand )

मुक्ति-मार्ग – मुंशी प्रेमचंद ( Mukti Marg – Munshi Premchand ) मुक्ति-मार्ग सिपाही को अपनी लाल पगड़ी पर, सुन्दरी को अपने गहनों पर और वैद्य को अपने सामने बैठे हुए रोगियों पर जो घमंड होता है, वही किसान को अपने…

आखिरी हीला – मुंशी प्रेमचंद ( Aakhiri Hila – Munshi Premchand )

आखिरी हीला – मुंशी प्रेमचंद ( Aakhiri Hila – Munshi Premchand ) आखिरी हीला यद्यपि मेरी स्मरण-शक्ति पृथ्वी के इतिहास की सारी स्मरणीय तारीखें भूल गयीं, वह तारीखें जिन्हें रातों को जागकर और मस्तिष्क को खपाकर याद किया था; मगर…

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