दफ़्तरी – मुंशी प्रेमचंद ( Daftari – Munshi Premchand )

दफ़्तरी – मुंशी प्रेमचंद ( Daftari – Munshi Premchand ) दफ़्तरी रफाकत हुसेन मेरे दफ्तर का दफ्तरी था। 10 रु. मासिक वेतन पाता था। दो-तीन रुपये बाहर के फुटकर काम से मिल जाते थे। यही उसकी जीविका थी, पर वह…

दुस्साहस – मुंशी प्रेमचंद ( Dussahas – Munshi Premchand )

दुस्साहस – मुंशी प्रेमचंद ( Dussahas – Munshi Premchand ) दुस्साहस लखनऊ के नौबस्ते मोहल्ले में एक मुंशी मैकूलाल मुख्तार रहते थे। बड़े उदार, दयालु और सज्जन पुरुष थे। अपने पेशे में इतने कुशल थे कि ऐसा बिरला ही कोई…

कप्तानसाहब – मुंशी प्रेमचंद ( Kaptansahab – Munshi Premchand )

कप्तानसाहब – मुंशी प्रेमचंद ( Kaptansahab – Munshi Premchand ) कप्तानसाहब जगत सिंह को स्कूल जान कुनैन खाने या मछली का तेल पीने से कम अप्रिय न था। वह सैलानी, आवारा, घुमक्कड़ युवक थां कभी अमरूद के बागों की ओर…

नशा – मुंशी प्रेमचंद ( Nasha – Munshi Premchand )

नशा – मुंशी प्रेमचंद ( Nasha – Munshi Premchand ) नशा ईश्वरी एक बड़े जमींदार का लड़का था और मैं एक गरीब क्लर्क का, जिसके पास मेहनत-मजूरी के सिवा और कोई जायदाद न थी। हम दोनों में परस्पर बहसें होती…

दो कब्रें – मुंशी प्रेमचंद ( Do Kabren – Munshi Premchand )

दो कब्रें – मुंशी प्रेमचंद ( Do Kabren – Munshi Premchand ) दो कब्रें अब न वह यौवन है, न वह नशा, न वह उन्माद। वह महफिल उठ गई, वह दीपक बुझ गया, जिससे महफिल की रौनक थी। वह प्रेममूर्ति…

मर्यादा की वेदी – मुंशी प्रेमचंद ( Maryada ki Vedi – Munshi Premchand) Part 2

मर्यादा की वेदी – मुंशी प्रेमचंद ( Maryada ki Vedi – Munshi Premchand) Part 2 5 दस बजे रात का समय था। रणछोड़ जी के मन्दिर में कीर्तन समाप्त हो चुका था और वैष्णव साधु बैठे हुए प्रसाद पा रहे…

मर्यादा की वेदी – मुंशी प्रेमचंद ( Maryada ki Vedi – Munshi Premchand)

मर्यादा की वेदी – मुंशी प्रेमचंद ( Maryada ki Vedi – Munshi Premchand) मर्यादा की वेदी यह वह समय था जब चित्तौड़ में मृदुभाषिणी मीरा प्यारी आत्माओं को ईश्वर-प्रेम के प्याले पिलाती थी। रणछोड़ जी के मंदिर में जब भक्ति…

नमक का दारोगा – मुंशी प्रेमचंद (Namak ka Daroga – Munshi Premchand)

नमक का दारोगा – मुंशी प्रेमचंद ( Namak ka Daroga – Munshi Premchand) नमक का दारोगा जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वरप्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक…

मुक्तिधन – मुंशी प्रेमचंद ( Muktidhan – Munshi Premchand)

मुक्तिधन – मुंशी प्रेमचंद ( Muktidhan – Munshi Premchand) मुक्तिधन भारतवर्ष में जितने व्यवसाय हैं, उन सबमें लेन-देन का व्यवसाय सबसे लाभदायक है। आम तौर पर सूद की दर 25 रु. सैकड़ा सालाना है। प्रचुर स्थावर या जंगम सम्पत्ति पर…

धिक्कार – मुंशी प्रेमचंद ( Dhikkar – Munshi Premchand)

धिक्कार – मुंशी प्रेमचंद ( Dhikkar – Munshi Premchand) धिक्कार ईरान और यूनान में घोर संग्राम हो रहा था। ईरानी दिन-दिन बढ़ते जाते थे और यूनान के लिए संकट का सामना था। देश के सारे व्यवसाय बंद हो गये थे,…

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